📖 कक्षा 11 हिंदी - बिहार बोर्ड
📘 गद्य + पद्य + 📝 समाधान PDF + ✅ MCQ + 📚 हिंदी व्याकरण
📖 हिंदी - विषय अनुसार अध्याय
📖 अध्याय पढ़ने के लिए कार्ड पर क्लिक करें
कृपया किसी अध्याय के कार्ड पर Book, Solution या MCQ बटन पर क्लिक करें।
यहाँ आपको हर अध्याय की पुस्तक PDF, हल PDF और ऑब्जेक्टिव प्रश्न (MCQ) मिलेंगे।
हिंदी साहित्य का इतिहास
आधुनिक काल के प्रमुख लेखक एवं उनकी रचनाएँ
हिंदी व्याकरण - सम्पूर्ण ज्ञान
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, संधि, समास
कविता की व्याख्या
प्रसिद्ध कविताओं की सरल हिंदी व्याख्या
संज्ञा
किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं।
संज्ञा के प्रकार: व्यक्तिवाचक (राम, पटना), जातिवाचक (लड़का, नदी), भाववाचक (सुंदरता, मिठास), द्रव्यवाचक (सोना, दूध), समूहवाचक (कक्षा, सभा)।
सर्वनाम
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं।
सर्वनाम के प्रकार: पुरुषवाचक (मैं, तू, वह), निजवाचक (आप, स्वयं), निश्चयवाचक (यह, वह), अनिश्चयवाचक (कोई, कुछ), संबंधवाचक (जो, सो), प्रश्नवाचक (कौन, क्या)।
विशेषण
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।
विशेषण के प्रकार: गुणवाचक (अच्छा, सुंदर), संख्यावाचक (दो, पाँच), परिमाणवाचक (थोड़ा, बहुत), सार्वनामिक (जो, वह)।
क्रिया
जिस शब्द से किसी कार्य का करना या होना पता चले, उसे क्रिया कहते हैं।
क्रिया के प्रकार: सकर्मक क्रिया (जिसका फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़े), अकर्मक क्रिया (जिसका फल कर्ता पर ही पड़े), प्रेरणार्थक क्रिया (दूसरे से काम कराना)।
संधि
दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं।
संधि के प्रकार: स्वर संधि (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण), व्यंजन संधि (उदा: जगत् + ईश = जगदीश), विसर्ग संधि (उदा: नमः + ते = नमस्ते)।
समास
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने नए शब्द को समास कहते हैं।
समास के प्रकार: अव्ययीभाव (प्रतिदिन), तत्पुरुष (राजपुरुष), कर्मधारय (नीलकमल), द्वंद्व (राम-लक्ष्मण), बहुव्रीहि (चक्रपाणि)।
मुहावरे और लोकोक्तियाँ
मुहावरे: आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना), नाक में दम करना (तंग करना), चाँद पर थूकना (असंभव कार्य करना)।
लोकोक्तियाँ: ऊँची दुकान फीके पकवान (दिखावा अधिक, सार कम), अंधों में काना राजा (अशिक्षितों में थोड़ा पढ़ा भी श्रेष्ठ)।
अलंकार
काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व अलंकार कहलाते हैं।
अलंकार के प्रकार: उपमा (जैसे: मुख चंद्रमा के समान), रूपक (जैसे: चरण कमल), उत्प्रेक्षा (जैसे: मानो), अनुप्रास (वर्णों की आवृत्ति), यमक (शब्दों की आवृत्ति)।
छंद
छंद वह विशेष रचना है जिसमें वर्णों की संख्या और मात्राओं का नियम होता है।
प्रमुख छंद: दोहा (24 मात्राएँ), सोरठा (24 मात्राएँ), चौपाई (16 मात्राएँ), हरिगीतिका (28 मात्राएँ), कवित्त, सवैया।
निबंध एवं पत्र लेखन
निबंध के प्रकार: वर्णनात्मक, विवेचनात्मक, कल्पनात्मक, आलोचनात्मक।
पत्र के प्रकार: औपचारिक पत्र (प्रधानाचार्य, संपादक, अधिकारी), अनौपचारिक पत्र (मित्र, परिजन)।
वर्तनी एवं वाक्य शुद्धि
अशुद्ध → शुद्ध: अनुभवी → अनुभवी, निरोग → नीरोग, आशीर्वाद → आशीर्वाद, पुजारी → पूजारी।
वाक्य शुद्धि: मैं जा रहा हूँ (शुद्ध), मैं जा रहा है (अशुद्ध)।