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🕉️ कक्षा 11 संस्कृत - बिहार बोर्ड

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संस्कृत श्लोकों का उच्चारण

शुद्ध उच्चारण और अर्थ सहित

संस्कृत व्याकरण - सरल भाषा में

शब्द रूप, धातु रूप, संधि, समास

प्रसिद्ध श्लोकों की व्याख्या

भर्तृहरि, कालिदास, भवभूति के श्लोक

शब्द रूप

राम, फल, गुरु, मति, पितृ, राजन् आदि शब्दों के रूप। संस्कृत में 3 वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) और 8 कारक होते हैं।
प्रमुख शब्द रूप: राम (पुल्लिंग), फल (नपुंसकलिंग), मति (स्त्रीलिंग), गुरु (पुल्लिंग), पितृ (पुल्लिंग), राजन् (पुल्लिंग)

धातु रूप

पठ् (पढ़ना), गम् (जाना), भू (होना), अस् (होना), कृ (करना), दा (देना), भण् (कहना), स्था (खड़ा होना) आदि धातुओं के लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ् लकारों में रूप।
लट् लकार (वर्तमान काल): पठति, पठतः, पठन्ति

सन्धि

स्वर सन्धि: दीर्घ (राम+अश्वः = रामाश्वः), गुण (राम+इन्द्रः = रामेन्द्रः), वृद्धि (राम+ऋषिः = रामर्षिः), यण (अति+अन्त = अत्यन्त)
व्यंजन सन्धि: जगत् + ईश = जगदीश, तत् + लोकः = तल्लोकः
विसर्ग सन्धि: नमः + ते = नमस्ते, दुः + जन = दुर्जन

समास

समास के प्रकार: अव्ययीभाव (प्रतिदिन, यथाशक्ति), तत्पुरुष (राजपुरुष = राजा का पुरुष), कर्मधारय (नीलकमल = नीलं च तत् कमलम्), द्वंद्व (राम-लक्ष्मण = रामश्च लक्ष्मणश्च), बहुव्रीहि (चक्रपाणि = चक्रं पाणौ यस्य सः)

प्रत्यय

कृत् प्रत्यय: क्त (पठ् + क्त = पठितः), क्तवतु (पठ् + क्तवतु = पठितवान्), तुमुन् (पठ् + तुमुन् = पठितुम्), ल्यप् (पठ् + ल्यप् = पठित्वा)
तद्धित प्रत्यय: मतुप् (बुद्धि + मतुप् = बुद्धिमान्), ठक् (गङ्गा + ठक् = गाङ्गेयः)

कारक

आठ कारक: कर्ता (ने), कर्म (को), करण (से), संप्रदान (के लिए), अपादान (से), संबंध (का), अधिकरण (में), संबोधन (हे)
उदाहरण: रामः फलम् खादति (राम ने फल खाया - कर्ता, कर्म), रामेण फलम् खाद्यते (राम से फल खाया जाता है - करण)

उपसर्ग

22 उपसर्ग: प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुस्, दुर्, वि, आ, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि, उप।
उदाहरण: प्र + गम् = प्रगच्छति (आगे बढ़ना), वि + गम् = विगच्छति (अलग होना)

प्रसिद्ध श्लोक

विद्या ददाति विनयम्, विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम्॥

सत्यमेव जयते नानृतम्, सत्येन पन्था विततो देवयानः।

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन, मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

वाच्य परिवर्तन

कर्तृवाच्य: रामः फलम् खादति (राम फल खाता है)
कर्मवाच्य: रामेण फलम् खाद्यते (राम के द्वारा फल खाया जाता है)
भाववाच्य: रामेण खाद्यते (राम के द्वारा खाया जाता है)

छन्दः शास्त्र

प्रमुख छंद: अनुष्टुप् (श्लोक) - 32 वर्ण, गायत्री - 24 वर्ण, त्रिष्टुप् - 44 वर्ण, जगती - 48 वर्ण
मात्रिक छंद: दोहा (24 मात्राएँ), सोरठा (24 मात्राएँ), चौपाई (16 मात्राएँ)